बिक gya hai wakt बिक gaye hai ज़मीर dilo se hai भिखारी zamana jani par hessiyat ka बड़ा अमीर Upper बेठे आकाओ ne बदल दिया खेल गुलाम घूम रहे खुले गगन main आज़ाद बेठे कारागार मे ख्वाब छीन लिए लोगो se छीन लिए लहजे सोच बाँध di खुदा तक खुदा बाँध दिए मंदिर मस्जिद तक कुछ समझदार लोग hai किसी फरिश्ते ke इंतज़ार main unse ये kehna chahuga गाँधी aate nahi गाँधी bante hai mere dost